सोमवार, 21 जुलाई 2025

लिखे कैसे

 

मन की बात तुम्हे दिखे कैसे

अब इतना कोयी लिखे कैसे


तू मिले सबसे और हम देखें

कौन कहां कीधर किसे कैसे


रख पहचान हर एक से वर्ना

बेरुख़ी  में  रहेंगे  टिके  कैसे


इक फूटी कौड़ी के भी ना थे

तेरी मुहब्बत  में  बिके  कैसे


भूल आगे  पीछे अभी में जी

देखें ज़िन्दगी फिर पिसे कैसे


जिन्हे समझ भी नही आते हम

उन के  शोर  हैं  कि  इसे  कैसे


रात जले  काले हुए  'दीपक’

अज़माये थे तो  फिके  कैसे