मन की बात तुम्हे दिखे कैसे
अब इतना कोयी लिखे कैसे
तू मिले सबसे और हम देखें
कौन कहां कीधर किसे कैसे
रख पहचान हर एक से वर्ना
बेरुख़ी में रहेंगे टिके कैसे
इक फूटी कौड़ी के भी ना थे
तेरी मुहब्बत में बिके कैसे
भूल आगे पीछे अभी में जी
देखें ज़िन्दगी फिर पिसे कैसे
जिन्हे समझ भी नही आते हम
उन के शोर हैं कि इसे कैसे
रात जले काले हुए 'दीपक’
अज़माये थे तो फिके कैसे
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें